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महायोगी तपसी सरकार का जीवन

तपसी सरकार की महिमा


सरकार तो अजन्मा हैं, अनंत शक्तियों का उद्गम हैं। उनकी महिमा का बखान शब्दों में करना अति कठिन है।

हमारे सरकार दया के सागर हैं। वे अपने शिष्यों एवं भक्तों पर हमेशा कृपादृष्टि बनाये रखते हैं। वे तो पूर्णयोगी और साक्षात् ईश्वर ही हैं।

सच्चे संत हमेशा ही अपनी महिमा में, अपने स्वभाव में स्थित रहते हैं। सत्य ही उनका स्वरुप है। वे सत्, चित एवं आनंदस्वरुप हैं।

हमारे सदगुरु सरकार (बाबा तपसी सरकार) हनुमान जी के अवतार हैं। वे हनुमान जी ही हैं, वे चिरंजीवी हैं। हम सब की सांसों में बसने वाले ऐसे सच्चे फकीर को कोटि-कोटि प्रणाम है।

अगर सत्य को पहचानना हो तो सच्चे संतों की शरण लेनी ही पड़ती है। जीवन के परम सत्य को प्राप्त करना सच्चे सदगुरु की कृपा से ही संभव है।

गुरु बिन ज्ञान न उपजे,
गुरु बिन मिटे न भेद,
गुरु बिन संशय न मिटे,
जय जय गुरुदेव....

अर्थात गुरु की कृपा के बिना ज्ञान नहीं प्राप्त होता। गुरु के बिना द्वैत (मायाजाल) नहीं मिटता। गुरु के बिना जीवन के संशयों का मिटना असंभव है। गुरु की कृपा से सब कुछ संभव है, ऐसे सदगुरु की बारम्बार जय जयकार है।

सदगुरु एक ऐसी नाव हैं जो शिष्य को संसार-सागर से पार लगाते हैं। सदगुरु ज्ञानसूर्य हैं जो अपने ज्ञान के प्रकाश से साधक के जीवन को आलोकित करते हैं जिसके सहारे शिष्य अपनी आत्मा का साक्षात्कार कर लेता है। परम सत्य की उपलब्धि करना ही मानव जीवन का परम ध्येय है, और वह परम सत्य सदगुरु की कृपा से ही उपलब्ध होता है। सरकार जी के बारे में जितना कहा जाय उतना कम है। वे तो पूर्णब्रम्ह हैं और साक्षात जगदीश ही हैं।

सदगुरु की महिमा