तपसी सरकार जी के चमत्कार

पूज्य तपसी सरकार जी एक महायोगी थे और हनुमान जी के अवतार थे। उन्होंने अपने अवतरण के उदेश्यों को पूर्ण करने के लिए बहुत से सामाजिक और आध्यात्मिक कार्य किये जिसके द्वारा समाज उनके सामने सदैव ही नतमस्तक रहेगा। उनके लीला-काल में उनके द्वारा सहज में ही अनेकों चमत्कार हुए।

सदगुरु की महिमा निराली होती है, हम सब नहीं जानते इसीलिए तो संसार में सुख ढूंढते हैं.
मेरे सरकार सदगुरु सरकार, हमारे भगवान, हमारी आत्मा, वो महापुरुष अजन्मा, महायोगी मेरे सरकार !
हमें अज्ञान के अंधकार से खींचकर ज्ञान के प्रकाश में लाए, ऐसे करुणामय, दयामय मेरे सरकार जी को कोटि-कोटि प्रणाम है.
मैं क्या बयान करूँ? उन्होंने मुझे सहारा दिया, मुझ डूबते हुए को बचाया.
वाह! मेरे सरकार, आपने सिद्ध कर दिया कि आप ही मेरी आत्मा हैं.
आपके बिना मेरा कोई वजूद ही नहीं है.
मेरे सरकार, आप गरीब बाबा से कहते थे न कि वो आ रहे हैं, उनके लिए भी भोजन बना दीजिये तो गरीब बाबा भोजन बना देते थे.
और जब मैं पहुँच जाता तो आप स्वयं मुझे बैठाकर प्यार से भोजन कराते, उसके बाद ही आप स्वयं भोजन करते थे.
कितने दयालु हैं आप, कितनी करुणा है आपमें, कितनी सरलता है आपमें...
वाह! मैं तो धन्य हो गया आपको पाकर!
आप मेरे सदगुरु हैं यही मेरी पहचान है.
मैं क्या हूँ? आप हैं तभी तो मैं हूँ.
आपके लिए ही जी रहा हूँ, सिर्फ आपके लिए.
आप ही मेरे दाता हैं, यह जीवन तो आप ही ने दिया है.
मैं कितना बयान करूँ? आपके साथ बिठाये पलों को याद करके मेरा गला भर आता है.
सरकार, आप तो सबके लिए हैं. परन्तु मेरे लिए तो सिर्फ आप ही हैं....
मेरे सरकार को, मेरे भगवान को, मेरे महान तपस्वी सदगुरु को कोटि-कोटि प्रणाम है.

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जब कभी भण्डारा होता था तो मनोरमा तट पर बहुत बड़ा आयोजन होता था। कहीं कुछ सेवा चल रही है, कहीं कुछ...ऐसे बहुत खुशनुमा माहौल होता था।
लोग बैठे है पंगत में खाने के लिए...
एक स्टोव पर खाना बन रहा है और खाने के लिए बैठे हैं ५०० लोग?
लेकिन आश्चर्य ! सतत पंगत चलती थी, खाना कभी कम नहीं पड़ता था।
ऐसे में पूज्य सरकार जी जब मौज में आते थे तो रसोई में जाते और जलती कड़ाही में हाथ डालकर पूड़ी निकालते और सबको गरम-गरम पूड़ी परोसते। ऐसा वे कई बार करते थे। यह घटना तो सबके समक्ष थी।

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एक बार जीतेन्द्र सिंह तोमर आये थे। वे सरकार के प्रिय भक्त थे, राजीव गांधी के समय से राजनीति में थे, सांसद भी थे।
बागीचे में बैठे थे सरकार के नजदीक...
सरकार ने पूछा," जीतेन्द्र सिंह, आम खाना है?"
तोमर जी बोले," सरकार जी, इस मौसम में आम? आम का मौसम तो है नहीं।"
सरकार बोले," आपको खाना है?"
तोमर जी बोले, "जी सरकार।"
उसी समय आम के वृक्ष से ढेर सारे पके आम गिरे।
जीतेन्द्र सिंह तोमर के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा।
सरकार से उन्होंने पूछा,"ये कैसे हुआ, सरकार जी?"
सरकार बोले,"आपको तो आम खाने से मतलब है। जितना खाना हो खा लीजिये। इतना मत सोचिये।"
फिर उन्होंने आम खाया।

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